कांग्रेस नेताओं ने सरकारी योजनाओं पर की परिचर्चा

लखनऊ 21 अक्टूबर।
पंद्रहवें वित्त आयोग भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ पूर्व प्रस्तावित बैठक के तहत आज उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी का प्रतिनिधिमंडल, जिसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सलमान खुर्शीद एवं प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डाॅ0 अनूप पटेल शामिल रहे, ने वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन0के0 सिंह सहित प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों के साथ बैठक में कांग्रेस पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के बेहतर आर्थिक विकास हेतु अपना सुझाव प्रस्तुत किया। बैठक में शामिल होने के पूर्व कांग्रेस के सदस्यों ने कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता श्रीमती आराधना मिश्रा'मोना' जी के साथ वित्त आयोग के समक्ष रखे जाने वाले सुझावों पर गहन विचार-विमर्श किया।
वित्त आयोग के समक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सलमान खुर्शीद एवं डाॅ0 अनूप पटेल ने सुझाव रखते हुए कहा कि 14वें वित्त आयोग ने केन्द्र सरकार द्वारा उ0प्र0 को केन्द्रीय करों में से 42 प्रतिशत धनराशि देने का निर्धारण किया था लेकिन प्रदेश का शेयर घटाकर 17.95 प्रतिशत कर दिया गया। यह उ0प्र0 राज्य का भारी नुकसान था। केन्द्र के साथ प्रदेश में जिस प्रकार जीएसटी लागू किया गया उससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हुआ है। कांग्रेस पार्टी 15वें वित्त आयोग से निवेदन करती है कि उ0प्र0 के लिए अनुमन्य धनराशि का शेयर इस बार घटाया न जाए। उन्होने प्रदेश के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, ऊर्जा, कृषि, सिंचाई, शहरी तथा ग्रामीण विकास, परिवहन तथा अनु0जाति/जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्गों के कल्याण हेतु माननीय वित्त आयोग से इन क्षेत्रों को विशेष धनराशि आवंटित किये जाने का निवेदन किया। उन्होने कहा कि जिस तरीके से प्रदेश का राजकोषीय घाटा तय मानक 3 प्रतिशत अधिक हो गया, यह चिन्ता का विषय है। वर्तमान सरकार अपने बजट का ज्यादातर पैसा अपनी विचारधारा से ओतप्रोत योजनाओं के सिर्फ प्रचार-प्रसार पर लगा रही है जबकि केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को लागू कराने में विफल साबित हो रही है। केन्द्र सरकार की आयुष्मान योजना हो या किसान सम्मान निधि योजना या किसान ऋण माफी आदि योजनाओं के लिए आवंटित मद को सरकार व्यय नहीं कर पायी है। उन्होने प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शिक्षा की बेहतरी तथा रोजगार सृजन पर जोर दिया। उन्होने कहा कि एक तरफ प्रदेश सरकार दो लाख रोजगार प्रतिवर्ष देने का वादा करती है लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित नौकरियां जैसे शिक्षा मित्र, अनुदेशक और होमगार्ड के जवानों की नौकरियां खत्म कर रही है इससे ग्रामीण स्तर पर अर्थव्यवस्था कमजोर होने से प्रदेश के आर्थिक ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होने शहरी निकायों और पंचायत इकाइयों के और अधिक आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया। राज्य सरकार के लिए वन सुरक्षा, वन क्षेत्र का विस्तारण और आदिवासियों को वन संबंधी अधिकार दिया जाना बहुत आवश्यक है। हाल ही में सोनभद्र जनपद में आदिवासियों का नरसंहार आदिवासियों के वन संबंधी अधिकारों में हस्तक्षेप का दुष्परिणाम रहा है। उ0प्र0 के बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल क्षेत्र को विशेष आर्थिक पैकेज की आवश्यकता है। बुन्देलखण्ड में सिंचाई, पर्यटन का विकास व दलहन की पैदावार बढ़ाने तथा पूर्वांचल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए वित्त आयोग राज्य सरकार को विशेष आर्थिक अनुदान देने की व्यवस्था करे। जीवनदायिनी गंगा के संरक्षण के नाम पर धन का बन्दरबांट हो रहा है और न गंगा साफ हो रही है और न ही संरक्षण हो पा रहा है, ऐसे में वित्त आयोग को इसकी मानीटरिंग की भी व्यवस्था करनी चाहिए।


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